Class Biology Ncert जीवो में जनन सभी महत्वपूर्ण टॉपिक subjective-

Class Biology Ncert जीवो में जनन सभी महत्वपूर्ण टॉपिक subjective-

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(1) जनन किसे कहते हैं ?
उत्तर – जीवो में होने वाली ऐसी प्रक्रिया जिसमें जीव अपने सामान नहीं संतति की उत्पत्ति करते हैं तथा अपने जाति में अस्तित्व बनाए रखते हैं उसे जनन कहते हैं ।

– इसे रिप्रोडक्शन भी कहते हैं ।
– इसे प्रजनन भी कहा जाता है ।
– इसके द्वारा अनुवांशिक गुणों का आदान-प्रदान होता है।
– जनन दो प्रकार के होते हैं ।
1) अलैंगिक जनन
2) लैंगिक जनन

1) अलैंगिक जनन किसे कहते हैं ?
उत्तर – जनन की ऐसी प्रक्रिया जिसमें जीव युग्मक संलयन के बिना ही नहीं संतति के उत्पत्ति करते हैं उसे अलैंगिक जनन कहते हैं ।

– इसमें एक ही जी भाग लेते हैं

(2) जीवन अवधि क्या है ?
उत्तर – किसी जीव के जन्म से लेकर उसके प्राकृतिक मृत्यु तक की अवधि को जीवन अवधि कहते हैं ।

– इसे जीवन काल भी कहा जाता है
– विभिन्न जीवो के जीवन अवधि भिन्न-भिन्न होती है
– इसे life span भी कहा जाता है

जैसे – सूक्ष्म जीव के जीवन अवधि कुछ ही घंटों के होते हैं ।
– घरेलू मक्खी- 1 दीन
– कौवा – 15 वर्ष
– गया – 26 वर्ष
– तोता 140 वर्ष
– पीपल। – 500 वर्ष
– बरगद ‌ – 200 वर्ष
– आम। – 200 वर्ष
कछुआ – 200 से300

(3) कायिक प्रवर्धन किसे कहते हैं ?
उत्तर – अलैंगिक जनन की ऐसी प्रक्रिया जिसमें पुष्प को छोड़कर जड़ तना एवं पत्ती पौधे से अलग होकर नई संतति के उत्पत्ति करते हैं उसे कायिक प्रबंधन करते हैं।
जैसे- हल्दी ,अदरक ,शीशम ,इत्यादि ।

– कायिक प्रबंधन दो प्रकार के होते हैं।
1) प्राकृतिक कायिक प्रबंधन
2) कृत्रिम काय प्रबंधन ।

1) प्राकृतिक कायिक प्रबंधन किसे कहते हैं ?
उत्तर – अलैंगिक जनन की ऐसी प्रक्रिया जिसमें पौधे से जड़ तना एवं पत्ती विलग होकर नहीं संतति की उत्पत्ति करते हैं उसे प्राकृतिक कायिक एक प्रबंधन कहते हैं ।

– यह तीन प्रकार के होते हैं
‌ 1) जड़ द्वारा
2) तना द्वारा
3) पति द्वारा ।

1) जर द्वारा – जब किसी पौधे के जड़ से कालिकाएं निकलकर नए पौधे के निर्माण करते हैं उसे जड़ द्वारा कहते हैं ।
जैसे – शीशम, परवल,इत्यादि।

2) तना द्वारा – जब किसी पौधे के तना अलग होकर नए पौधे की उत्पत्ति करते हैं तो उसे तना द्वारा कायिक प्रवर्धन कहते हैं ।

– यह तीन प्रकार के होते हैं ।

1) भूमिगत तना द्वारा
2) अर्द्ध वायवीय तना द्वारा
3) वायवीय तना द्वारा

1)भूमिगत तना द्वारा -जब भूमिगत तना अलग होकर नए पौधे की उत्पत्ति करते हैं उसे भूमिगत तना द्वारा करते हैं

यह चार प्रकार के होते हैं।
1) प्रंकद
2) धनकंद
‌‌ 3) कंद
4) सलकंद

1) प्रकंद – इसमें भूमिगत तना भूमि के अंदर प्रतिकूल परिस्थिति में दबे रहते हैं जो अनुकूल परिस्थिति पाते हैं विकसित होकर नए संतति के उत्पत्ति करते हैं जिसे पसंद करते हैं । जैसे बस ,केला, जलकुंभी , हल्दी अदरक ,इत्यादि।

Note –
‌। – जलकुंभी 8 महीने में लगभग 65000 संतति के उत्पत्ति करते हैं साथ ही यह बंगाल के नदियों में अधिक पाई जाती है इसीलिए इसे बंगाल का आतंक कहा जाता है ।

बांस अपने जीवन में केवल एक बार फूल देते हैं जबकि नीला कुरिंजी 12 वर्ष में एक बार फूल देता है या खासकर हिमालय क्षेत्र कर्नाटक तमिलनाडु तथा आदि जगह पाए जाते हैं

2)घनकंद- इसमें भूमिगत तना नीचे की और वृद्धि करता है तथा इसके ऊपर पूर्व संध्या होती है जो विकसित होकर नहीं संतति के उत्पत्ति करते हैं उसे धन कंद कहते हैं जैसे प्यार जीव कंद प्रोक्स ।  madhav Ncert hindi

3) कंद – इसमें कालिकाएं फुल कर गोलाकार हो जाते हैं जिसे कंद कहते हैं जैसे आलू

4) सलकंद -इसमें साल पत्र एवं तन्ना सम्मिलित होकर चक्ती के समान हो जाते हैं उसे सलकंद कहते हैं जैसे लहसुन प्याज

( 2) अर्ध वायवीय तना द्वारा- वे तना जिसका आधा भाग भूमि के अंदर तथा आधा भाग भूमि के बाहर होता है उसे अर्थ वायवीय तना द्वारा कहते हैं।

यह चार प्रकार के होते हैं ।

1) ऊपरीभुस्थारी
2) अंतभुस्थारी
3) भुस्थारीका
4) भुस्थारी

1) ऊपरीभुस्तारी – यह रेंगने वाली रूपांतरित तना है जो भूमि पर क्षेतीज रूप से आगे बढ़ते हैं जब किसी कारण से यह टूट जाते हैं तो वह टूटे हुए भाग जर विकसित कर नए पौधे का जन्म देते हैं जैसे -खट्टी मीठी ;दूब घास ,लॉन घास ,ब्राह्मणी इत्यादि।

2) अंतभुस्तारी किसे कहते हैं।?-
उत्तर- यह भूमि के ऊपर तिरछी रूप से वृद्धि करते हैं ।
जैसे – गुलदाउदी,

3) भूस्तारीका किसे कहते हैं।?
उत्तर- यह जलीय पौधे होते हैं इसके शीर्ष पर पत्तियां का गुच्छा होता है जो किसी कारण बस टूटकर नए पौधे का विकास करते हैं।

जैसे – समुद्री घास, वाटर लेट, समुद्री शोक ,

4) भुस्तारी किसे कहते हैं .?
उत्तर- इसमें रूपांतरित तना खासकर घूमी के ऊपर विरदी करते हैं इनके ऊपर गांठ होते हैं जिसे नहीं संतति के उत्पत्ति होते हैं उसे भुस्तारी कहते हैं।

जैसे – स्ट्रॉबेरी , इत्यादि।

(3) वायवीय तना द्वार किसे कहते हैं ।
उत्तर – वे तना जिसके द्वारा भूमि के ऊपर वृद्धि एवं विकास कर नए पौधे का जन्म देती है उसे वायवीय तना द्वार करते हैं ।

जैसे – अमरबेल ,गन्ना, केला , इत्यादि

(4) कृत्रिम कायिक प्रवर्धन किसे कहते हैं ।
उत्तर – वे कायिक प्रवर्धन जिसमें वैज्ञानिक एवं विभिन्न तकनीकों के द्वारा नए पौधे का उत्पादन किया जाता है उसे कितनी इकाई प्रबंधन कहते हैं ।

– या निम्नलिखित प्रकार के होते हैं

1) कर्तन लगाना

2) गूटी लगाना

3) दांब लगाना

4) उत्तक संवर्धन

1) कर्तन लगाना किसे कहते हैं ?
उत्तर- इस विधि में जनक पौधे के शरीर से जड़ तना एवं पति को काटकर अलग किया जाता है जिसे कलम या कर्तन कहते हैं जो 1 फीट तक हो सकता है
इसमें कटे गए भाग को यानि कलम को मिट्टी में गाड़ दिया जाता है और उसे नामी प्राप्त किया जाता है जिससे उसमें कलिकाई निकलते हैं साथी जड़ से अपस्थानीक कालिकाएं निकलती है ।

 

जैसे – 🌿🪴

( 2) गूटी लगाना किसे कहते हैं ?
उत्तर- इसमें जनक पौधे के तने को छीलकर या खुरच कर उस पर मिट्टी लगाकर टाट एवं धागा से बांध देते हैं इस संरचना को गुटी कहते हैं इस विधि में अप स्थानिक जड़ निकलते हैं तथा इसमें छोटे-छोटे कालिकाएं निकलते हैं ।
जी से काटकर अलग कर दिया जाता है इस प्रकार एक नए पौधे का निर्माण होता है।

जैसे – अमरूद, लीची ,संतरा इत्यादि

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(3) दाब लगाना किसे कहते हैं।?
उत्तर- इस विधि में जनक पौधे के पतले एवं लचीले तना को दबाकर मिट्टी में गाड़ दिया जाता है जिससे नए अपस्थानिक कालिकाएं का निर्माण होता है साथ ही नीचे अपस्थानीक जड़े विकसित होकर नए पौधे का निर्माण करते हैं ।

जैसे- पीपल ,बरगद इत्यादि ।

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(4) उत्तक संवर्धन क्या है ?
उत्तर – यह अलैंगिक जनन की अत्याधुनिक विधि है इसमें किसी स्वस्थ वांछित पौधे के उत्तर से नए पौधे का निर्माण होता है उसे सूक्ष्म प्रजनन कहते हैं ।

– इसे उत्तक संवर्धन या सूक्ष्म प्रजनन भी कहा जाता है।

– इस विधि में किसी स्वस्थ पौधे से उत्तक को काटकर किसी संवर्धन माध्यम में रखा जाता है जहां वह पोषक तत्व को गर्म कर पिंड का निर्माण करते हैं जिसे कैल्स कहा जाता हैं पुनः इसे दूसरे संवर्धन माध्यम में रखा जाता है जहां से वह विकास कर नए गुण वाले पौधे का निर्माण करते हैं ।

= जननांग की उपस्थिति पर जननांग को दो भागों में बांटा गया ।

1) एक लिंगी
2) द्विलिंगी

1) एक लिंगी किसे कहते हैं ?
उत्तर- वह जीव जिसमें एक जननांग उपस्थित हो उसे एक लिंगी कहते हैं।

जैसे- गाय, मनुष्य ,पपीता ,भांग, शहतूत , इत्यादि
– इसे एकलिंगश्रय भी कहा जाता है ।

2) द्विलिंगी किसे कहते हैं?
उत्तर- वे जीव जिसमें दो जननांग उपस्थित हो उसे दूर लेंगी कहते हैं ।

जैसे- सरसों ,मक्का ,और गेहूं, केंचुआ आदि

– इसे द्विलिंगीश्रय भी कहा जाता है।
– इसे उभय लिंगी भी कहा जाता है।

– कुछ पौधे ऐसे होते हैं जो 1 वर्ष में केवल एक बार फुल लिया फल देते हैं उसे वार्षिक कहा जाता है।
जैसे – आम ,लीची ,जामुन ,इत्यादि।

Note –
आम प्राय 2 वर्ष में केवल एक बार फल देते हैं ।

-कुछ पौधे ऐसे होते हैं जो 1 वर्ष में कई बार फल या फल देते हैं
जैसे-, गुड़हल

( 5) मोनोकार्पिक फल किसे कहते हैं ?
उत्तर- वैसे पौधे जो जीवन में केवल एक बार फुल या फल देते हैं उसे मोनोकार्पिक फल कहते हैं।
जैसे- बॉस ,मक्का, धान ,गेहूं.

(6) अलैंगिक जनन से उत्पन्न संतति को एकलपुज या कॉलन क्यों कहा जाता है ?
उत्तर- अलैंगिक जनन से उत्पन्न संतति को कॉलन या एक कलपज ईसलिए कहा जाता है क्योंकि इसे उत्पन्न संतति संरचनात्मक एवं क्रियात्मक अनुवांशिक रूप से समान होते हैं।

(7) लैंगिक जनन कीघटनाएं किसे कहते हैं?
उत्तर- जीवो में लैंगिक जनन के दौरान होने वाली सभी घटनाएं को लैंगिक जनन घटनाएं कहते हैं

लैंगिक जनन घटनाएं को मुख्यतः तीन भागों में बांटा गया है

1) निषेचन पूर्व घटनाएं
2) निषेचन
3) निषेचन पश्च घटनाएं

1) निषेचन पूर्व घटनाएं किसे कहते हैं ?
उत्तर – लैंगिक जनन के प्रक्रिया में निषेचन से पूर्व होने वाली सभी घटनाएं को निषेचन पूर्व घटनाएं कहते हैं

– इसमें युग्मक का निर्माण होता है जिसे युग्मक जनन कहते हैं ।

-युग्मक जनन की प्रक्रिया में नर तथा मादा दोनों का युग्मक का निर्माण होता है ।
– दोनों युग्मक अगुनीत के रूप में रहते हैं।

2) निषेचन किसे कहते हैं ?
उत्तर,- नर युग्मक तथा मादा के सालन की क्रिया को निषेचन कहते हैं ।

– इसे फर्टिलाइजेशन भी कहा जाता है।

– इसमें नर तथा मादा युग्मक का सालन होता है जिसे युग्मनज का निर्माण होता है।

– नर युग्मक तथा मादा युग्मक अगुणित होते हैं जबकि युग मनोज द्विगुणित होते हैं ।

3) निषेचन पश्च घटनाएं किसे कहते हैं ?
उत्तर- निषेचन के पश्चात होने वाले परिवर्तनों को निषेचन पश्च घटनाएं कहा जाता है ।

– निषेचन के पश्चात यू मनोज बनता है एक मनोज विकसित होकर भुर्ण बनाता है ।

8 。अनिषेक जनन किसे कहते हैं ?
उत्तर – जब निषेचन के बिना ही नहीं संतति के उत्पत्ति होते हैं उसे अनिषेक जनन करते हैं ।

– इसे parthenogenesis भी कहा जाता है

– जैसे -मधुमक्खी।

(9.) किशोर चरण किसे कहते हैं?
उत्तर- किशोर चरण से तात्पर्य होता है जीव में उसके जन्म से लेकर प्रजनन की परिपक्वता तक पहुंचने की अवधि को किशोर चल कहते हैं

(10)‌ प्रजनन चरण क्या है ?
उत्तर – जीव के जीवन अवधि की वह अवस्था जिसमें वह जनन करने के लिए सक्षम हो जाता है प्रजनन कहा जाता है।

किशोरावस्था के समाप्ति के बाद ही प्रजनन अवस्था शुरू होता है ।

(11) बाय निषेचन किसे कहते हैं ?
उत्तर- शुक्राणु तथा अंडाणु के संलयन को निषेचन कहते हैं इसके फल स्वरुप द्विगुणित युगमाणु का निर्माण होता है अधिकांश साहिवाल मछलियां तथा उभयचर प्राणियों में शुक्राणुओं तथा अंडाणु का संलयन शरीर से बाहर जल में होता है उसे ही बायनिषेचन कहते हैं।

(12) अनिषेक फलन इसे कहते हैं ?
उत्तर – अंडाशय के बिना निषेचन के फल निर्माण की प्रक्रिया को अनिषेक फलन कहते हैं

इसका खोज नल नामक वैज्ञानिक ने किया था

( 13) जनन की कौन सी विधि अच्छी है और क्यों। ?
उत्तर – जनन की सबसे अच्छी विधि लैंगिक जनन होता है क्योंकि लैंगिक जनन में विभिनता के रूप पाई जाती है इसमें नर तथा मादा युग्मक का सहयोग होता है लैंगिक जनन से उत्पन्न संतति जनक जीव के समान नहीं होते हैं लैंगिक जनन में विपरीत लिंग वाले दो जनन भाग लेते हैं।

(14) अंड प्रजक किसे कहते हैं ?
उत्तर – वह जीव जिसमें भूर्ण का निर्माण एवं विकास जीवो के शरीर के बाहर होता है तथा जो अंडे देते हैं उसे अंड प्रजक कहते हैं ।
जैसे – मेंढक, सांप ,मगरमच्छ

– इसमें भूण का निर्माण शरीर के बाहर होता है!
– इसमें हैचिंग द्वारा नहीं संतति के उत्पत्ति होता है।
– इसमें परभक्षी का खतरा होता है।

(15) सजीव प्रजक किसे कहते हैं ?
उत्तर – वह जीव जिसमें भ्रूण का निर्माण शरीर के अंदर होता है तथा प्रसव क्रिया के द्वारा नहीं संतति के उत्पत्ति होता है उसे सजीव प्रजक कहते हैं।

– इसमें भूल का निर्माण शरीर के अंदर होता है – इसमें की क्रिया के द्वारा नई संतति के उत्पत्ति होता है
– इसमें पर पक्षियों का खतरा नहीं होता है।

(16) जीवो के लिए जनन क्यों अनिवार्य हैं?
उत्तर- जनन जीवो का बहुत महत्वपूर्ण गुण है इसी की उपस्थिति के कारण ही पृथ्वी पर विभिन्न जीवो का अस्तित्व बना हुआ है ।

(17) अलैंगिक जनन द्वारा बनी संतति लैंगिक जनन द्वारा बनी संतति के किस प्रकार भिन्न है
उत्तर- अलैंगिक जनन द्वारा बनी संतति एक दूसरे के और अपने जनक के अनुवांशिक रूप से समान होते हैं और लैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न संतति अपने जनक के समान नहीं होते हैं इसमें विभिन्न ता पाई जाती है ।

(18) अपने जटिलता के बावजूद बड़े जीव ने लैंगिक प्रजनन को पाया है क्यों।?
उत्तर- लैंगिक प्रजनन से उत्पन्न संतति अपने जनक के समान नहीं होती है इसमें विभिन्न ता पाई जाती है लैंगिक जनन जीवो को प्रतिकूल परिस्थितियों में जीवित रहने में सहायक होता है इसी कारण बड़े जीव ने अपनी जटिलता के बावजूद लैंगिक प्रजनन को अपनाया है।

(19) मुकुलन क्या है ?
उत्तर- अलैंगिक जनन की वैसी विधि जिसमें मुकुल के द्वारा नई संतति के उत्पत्ति होते हैं तो उसे मुकुलन कहते हैं इस विधि में जनक जीव के शरीर के धरातल से एक उभार निकलते हैं जिसे मुकुल कहते हैं मुकुल दो प्रकार के होते हैं ।

🙏✍️✅⭐

By madhv sir

 

 

 

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