Class 10,hindi subjective chapter 3 माँ

Class 10,hindi subjective chapter 3 माँ

 

             

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                Short Question

माँ

1. अस्पताल में भर्ती कराकर आने के बाद मंगु के भाई ने क्या प्रण किया?

उत्तर- अस्पताल में भर्ती कराकर आने के बाद मंगु के भाई ने प्रण किया

कि वह मंगु को पालेगा। बहू मल-मूत्र न धोएगी तो वह स्वयं धोएगा।

2. मंगु को अस्पताल में भर्ती कराकर आने के बाद माँ की क्या दशा हुई ?

उत्तर – मंगु को अस्पताल में भर्ती कराकर आने के बाद माँ रात भर सिसकती रही और सबेरे चीत्कार सुनकर सभी उठे तो देखा कि मंगु की माँ खुद पागल हो गई है।

3. मंगु जिस अस्पताल में भर्ती कराया जाता है उसके कर्मचारी व्यवहार कुशल हैं या संवेदनशील विचार करें।

उत्तर—मंगु को जिस अस्पताल में भर्ती कराया गया था, वहाँ के कर्मचारी व्यवहार कुशल और संवेदनशील दोनों थे। क्योंकि व्यावहारिक कुशलता से मरीजों का इलाज करते ही थे। परिजनों के साथ संवेदना भी बाँटते थे।

4. मंगु की माँ उसे अस्पताल में भर्ती कराने को कैसे राजी हुई?

उत्तर — गाँव की लड़की कुसुम का पागलपन जब अस्पताल जाने से दूर हो गया तो मंगु की माँ मंगु को अस्पताल में भर्ती कराने को राजी हुई।

5. मंगु को अस्पताल ले जाने के समय माँ की स्थिति कैसी थी ?

उत्तर – अस्पताल ले जाने के पूर्व की रात माँ को नींद नहीं आई। उसे

लेकर घर से निकलने लगी तो लगा कि ब्रह्माण्ड का भार उसके ऊपर आ गया। आँखों से सावन-भादों शुरू हो गया ।

6. मंगु कौन थी?

उत्तर – मंगु जन्म से पागल और गूंगी लड़की थी ।

7. मंगु की देख-रेख कौन और कैसे करता था ? उत्तर – मंगु की देख-रेख उसकी माँ बड़े यत्न से करती थी। वह उसे अपने पास सुलाती, खाना खिलाती और मल-मूत्र साफ करती थी ।

8. मंगु की माँ उसे अस्पताल में क्यों नहीं भर्ती कराना चाहती थी?

उत्तर – मंगु की माँ सोचती थी कि अस्पताल में मंगु की देखभाल ठीक से न होगी, इसलिए उसे भर्ती कराना नहीं चाहती थी।

9. ईश्वर पेटलीकर कौन हैं?

उत्तर—ईश्वर पेटलीकर गुजराती के जाने-माने कथाकार हैं।

10. ईश्वर पेटलीकर के साहित्य की क्या विशेषता है?

उत्तर—ईश्वर पेटलीकर के साहित्य में गुजरात का समाज, उसके मूल्य,दर्शन आदि साकार होते हैं।

11. ‘माँ’ कहानी के लेखक का क्या नाम है? वे कहाँ के रहने वाले हैं?

उत्तर—’माँ’ कहानी के लेखक ईश्वर पेटलीकर हैं। वे गुजरात के रहनेवाले हैं।

 

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1. ‘माँ’ कहानी के शीर्षक की सार्थकता पर विचार करें।.

उत्तर—मान्य सिद्धान्तों के अनुसार किसी रचना का शीर्षक उसके मूलभाव का द्योतक, आकर्षक और छोटा होना चाहिए। उस दृष्टि से देखें तो यह शीर्षक उपयुक्त है क्योंकि सारी कहानी माँ के क्रिया-कलापों, प्यार – ममता, आशंका, द्विविधा के इर्द-गिर्द ही घूमती है। रही बात आकर्षक होने की तो शीर्षक पढ़ने के साथ ही यह जिज्ञासा उठती है कि किसकी माँ, कैसी माँ? यह जिज्ञासा पाठक को कहानी पढ़ने के लिए आमंत्रण देती है। जहाँ तक शीर्षक के संक्षिप्त होने का प्रश्न है ‘माँ’ से संक्षिप्त शब्द और क्या हो सकता है?

इस प्रकार, कहानीकार ईश्वर पेटलीकर का ‘माँ शीर्षक चयन अत्यन्त सार्थक है।

2. माँ कहानी के आधार पर माँ की ममता का वर्णन करें।

उत्तर – माँ कहानी की नायिका अपने घर की मुखिया और सहनशील नारी है। वह सब कुछ करती है और लोग यदि उसकी आलोचना भी करते हैं तो चुपचाप सुनती है, कुछ कहती नहीं। वह अथक सेविका है। अपनी पागल पुत्री की देखभाल बड़ी लगन से करती है, उसे अपने पास सुलाती – नहलाती, खिलाती और उसका मल-मूत्र भी खुशी-खुशी साफ करती है। वह ऊबती नहीं, अपितु उसकी जुदाई की आशंका से व्याकुल हो उठती है। वह अपने सभी बच्चों को बहुत प्यार करती है। माँ व्यवहार कुशल भी है। वह अपने बहुओं की अपने प्रति शिकायत से परिचित है, किन्तु परिवार को विखंडित होने से बचाने के लिए कुछ नहीं कहती। उसका व्यवहार सभी लोगों से सौहार्द्रपूर्ण है। माँ अत्यन्त ममतामयी है। ममता के अतिरेक में ही, मंगु की जुदाई सहन नहीं कर पाती और पागल हो जाती है।

3. मंगु जिस अस्पताल में भर्ती की जाती है, उस अस्पताल के कर्मचारी व्यवहार कुशल हैं या संवेदनशील ? विचार करें।

उत्तर- मंगु जिस अस्पताल में भर्ती की जाती है उसके कर्मचारी कर्त्तव्य-परायण और व्यवहार कुशल हैं। वे मरीज और अभिभावक दोनों से सहृदयता से पेश आते हैं। वे अपना कर्त्तव्य जानते हैं कि उन्हें मरीजों के साथ सहानुभूति रखनी है, उनकी मनोभावनाओं को समझना है और उनकी आवश्यकताओं को भी। यही कारण है कि जब एक पगली अपने पति से उनकी शिकायत करती है, उन्हें भूतनी कहती है और कहती है कि ये अच्छे कपड़े नहीं देतीं तो परिचारिका उत्तेजित नहीं होती। कहती है कि पति का लाया खाना खा लो, अच्छे कपड़े दूँगी। एक परिचारिका जानते हुए भी कि मरीज ने मुँह धो लिया है, उसके कहने पर दुबारा मुँह धुलाती हैं। एक परिचारिका मंगु से मित्रवत् व्यवहार करती हुई कहती है कि मेरे साथ रहोगी तो अच्छे कपड़े और अच्छा खाना दूँगी। इतना ही नहीं, माँ की प्रत्येक जिज्ञासा का समाधान वहाँ की परिचारिकाएँ करती हैं-सोने, खाने, ठंड लगने, मल-मूत्र त्याग आदि के बारे में ये माँ को पूरी तरह आश्वस्त करती हैं। एक तो कहती है आज से में ही इसकी माँ है। आप निश्चिन्त रहिए।” व्यवहार कुशल और कर्तव्यपरायण होने के साथ-साथ वहाँ के कर्मचारी संवेदनशील भी दिखाई देते हैं। जैसे—जब माँ मंगु के माथे पर हाथ रखकर सिसक पड़ी तो ‘ऐसे रुदन से अभ्यस्त हो गए डॉक्टर, मेट्रन और परिचारिकाओं के हृदय भी भर आए। दीवारें आई हो उठीं।’ एक अन्य प्रसंग से भी यह स्पष्ट होता है माँ जी की करुण आँखों की तरफ नजर करने की मेट्रन की शक्ति लुप्त हो गई हो, वैसे ही वह नीची दृष्टि लिए बोली

‘अच्छा।’ उल्लिखित तथ्यों और वर्णित प्रसंगों से स्पष्ट होता है कि अस्पताल के कर्मचारी केवल व्यवहार कुशल ही नहीं, कर्त्तव्यपरायण और संवेदनशील भी हैं।

4. कुसुम के पागलपन में सुधार देख मंगु के प्रति माँ, परिवार और समाज की प्रतिक्रिया को अपने शब्दों में लिखें।

उत्तर – कुसुम पागल होने के बाद अस्पताल गई। वहाँ के इलाज से कुसुम चार महीने में भली-चंगी होकर लौटी। इलाज के प्रति आश्वस्त हो माँ ने कुसुम को बुलाकर अस्पताल के कर्मचारियों के व्यवहार और व्यवस्था के बारे में पूछा। जब कुसुम ने बताया कि अस्पताल के कर्मचारियों और डॉक्टरों के व्यवहार अत्यन्त आत्मीय हैं, तो माँ के विचार में परिवर्तन आया और वह मंग को अस्पताल में भर्ती कराने को तैयार हो गई। कुसुम के स्वस्थ होने पर परिवार के लोगों के विचार भी बदले और उन्हें लगा कि मंग भी ठीक हो सकती है। अतः अस्पताल भेजने का उन सबों ने मन बना लिया। कुसुम के ठीक होने की घटना से समाज और गाँव के लोग भी माँ को सलाह देने लगे- ‘माँ जी, आप मंगु को एक बार अस्पताल में भर्ती करके तो देखें जरूर वह अच्छी हो जाएगी।’

5. माँ मं को अस्पताल में क्यों नहीं भर्ती कराना चाहती ? विचार करें।

उत्तर- माँ मंगु को दो कारणों से अस्पताल में भर्ती कराना नहीं चाहती। पहला कारण है लोकलाज। वह समझती है कि यदि मंगु को अस्पताल में भर्ती करा देगी तो लोग कहेंगे कि बेटी के प्रति उसके हृदय में ममता या दुलार नहीं है और वह अपनी बेटी की सेवा करना नहीं चाहती, वला समझती है। दूसरा कारण है कि माँ जानती है कि मंगु पूरा पागल है। उसे किसी चीज की सुध नहीं है। वह मल-मूत्र भी विछावन पर ही कर देती है, ठंडी रात में ओड़ना फेंक देती है। खाना भी खुद नहीं खाती, खिलाना पड़ता है। कब क्या करना चाहिए मंगु नहीं जानती। अस्पताल में उसकी देखभाल अच्छी तरह होगी, इस बात की भी उसे आशंका है। उसे पता है कि अस्पताल में वैसे मरीज भी होते हैं जो मार-पीट करते हैं। उनसे मंगु की रक्षा कैसे होगी ? इन्हीं कारणों से माँ मंगु को अस्पताल में भर्ती कराना नहीं चाहती।

6. मंगु के प्रति माँ और परिवार के अन्य सदस्यों के व्यवहार में जो फर्क है, उसे अपने शब्दों में लिखें।

उत्तर- मंगु के प्रति परिवार के लोगों के व्यवहार में पर्याप्त अंतर है। माँ मंगु को दिलोजान से चाहती है, उसे अपने पास सुलाती है, खिलाती और उसका मल-मूत्र साफ करती है। मंग की बड़ी बहन कमु का विचार है कि माँ के अत्यधिक लाड़-दुलार से हो मंगु नित्य क्रिया जैसे कार्य नहीं करती। डाँट-डपट से तो जानवर भी बहुत से काम करने लगते हैं। मंगु की भाभियाँ उसके प्रति उपेक्षा का भाव रखती हैं। उनका ख्याल है कि मंग के कारण ही माँ उनके बच्चों को अपेक्षित प्यार दुलार नहीं करती। मंगु के दोनों भाई तटस्थ हैं। उनके मन में मंगु के प्रति ममता है किन्तु अपनी पत्नियों की किचकिच के डर से अपनी भावनाएँ व्यक्त नहीं करते। वे माँ की ममता और बेबसी समझते हैं।

 

Class 10,hindi subjective chapter 3 माँ

 

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